जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया आचार्य बालकृष्ण का जन्मोत्सव | Jokhim Samachar Network

Saturday, August 13, 2022

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जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया गया आचार्य बालकृष्ण का जन्मोत्सव

हरिद्वार। आजादी के अमृत महोत्सव में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण महाराज का 50वाँ जन्मदिवस ‘स्वर्णजयन्ती महोत्सव’ व ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया गया। आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित 75 ग्रन्थों को जनलोकार्थ लोकार्पित किया गया। साथ ही विविध रोगों के उपचार हेतु 51 नई औषधियों का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल ले.जन. गुरमीत सिंह ने आचार्य बालकृष्ण को 50वें जन्मदिवस की शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा जड़ी-बूटियाँ बोल नहीं सकती। लेकिन आचार्य बालकृष्ण ने इनका नामकरण किया है। 51 वॉल्यूम के रूप में ये जड़ी-बूटियाँ भी आशीर्वाद दे रही हैं। जड़ी-बूटियों को एक सूत्र में पिरोकर महाग्रन्थों की रचना से भारतीय संस्कृति व चिकित्सा की जड़ें और मजबूत होंगी। राज्यपाल ने कहा कि मुगलों व अंग्रेजों के जमाने में भारतीय वनस्पतियों व औषधीय रूपी जड़ी-बूटियों की उपेक्षा हुई। इन्हें पुनः सम्मान प्रदान करने का कार्य आचार्य बालकृष्ण ने किया है। उनके द्वारा किया गया यह पुरुषार्थ आने वाली पीढ़ियाँ सदियों तक याद रखेंगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि भारतीय ज्ञान के क्षेत्र में, आयुर्वेद परम्परा में, आयुर्वेद के अवतरण के विषय में आचार्य बालकृष्ण ने इतिहास लिखा ही नहीं अपितु इतिहास गढ़ा भी है। उन्होंने पूर्वज ऋषियों की प्राचीन परम्परा को आगे बढ़ाया है। 5 लाख से ज्यादा श्लोकों के साथ ऋषि परम्परा के अनुकूल विश्व भैषज संहिता, सौमित्रेय निघण्टु, सौमित्रेय निदानम् की रचना करके उन्होंने अद्भुत कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जब हम किसी बड़े व्यक्तित्व के विविध आयामों को देखते हैं तो शब्द भी निशब्द हो जाते हैं। आस्ट्रेलिया की माता सोमा नायर ने आचार्य बालकृष्ण के जीवन, चरित्र व व्यक्तित्व पर आधारित, जीवन के पूर्वार्ध में अब तक की उनकी उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक ‘साधना से सृजन’ की रचना कर अद्भुत प्रयास किया है। जिसका आज विमोचन किया जा रहा है। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणाप्रद होगी।
स्वामी रामदेव ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव पर 75वें स्वाधीनता वर्ष पर 75 ग्रन्थों की सौगात पतंजलि की ओर से मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज तीन बड़े कार्य एक साथ हो रहे हैं। पहला- भारतीय ज्ञान परम्परा में नया अवदान, जो आने वाले समय में हजारों-लाखों वर्षों तक जब-जब आयुर्वेद के इतिहास को याद किया जाएगा तो आचार्य बालकृष्ण के योगदान को स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। दूसरा आयुर्वेद में कई रोगों का उल्लेख नहीं था। वक्त के साथ रोग बढ़ते जा रहे थे। उनके उपचार के लिए 51 नई औषधियों का निर्माण कर चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा कार्य पतंजलि के माध्यम से आज हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें जो ज्ञान दिया, उसमें नए ज्ञान, नए अनुसंधान, नई साधना और नई सेवाओं का समावेश पतंजलि के माध्यम से किया गया है। आज योग-आयुर्वेद एक जनांदोलन बन चुका है। तीसरा भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन। जहाँ एक ओर पूरा विश्व शिक्षा की नई दिशाएँ खोज रहा था। शिक्षा की नई दिशाएँ भारतीय शिक्षा बोर्ड और पतंजलि विश्वविद्यालय से मिलेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर 15 अगस्त को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत स्वामी रामदेव ने अपनी सभी सोशल मीडिया साइट्स से अपनी फोटो हटाकर तिरंगा लगाने के निर्देश दिए तथा सभी देशवासियों से इस अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने का  आह्वान किया।
जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने आचार्य बालकृष्ण को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आजादी के अमृत महोत्सव में पूरे देश में अनेक आयोजनों की  शृँखला में पतंजलि नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। उन्होंने भारतीय शिक्षा बोर्ड के विषय में कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड भारतीय संस्कृति, संस्कार व परम्पराओं का संवाहक होगा और इसका स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण को जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आचार्य बालकृष्ण को पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा उपहार स्वरूप भेंट करते हुए कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने 75 ग्रन्थों की रचना कर आयुर्वेद की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद मात्र एक चिकित्सा पद्धति नहीं अपितु समग्र मानव दर्शन है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है जिसमें सम्पूर्ण विश्व का कल्याण निहित है। कोरोना महामारी में पूरे विश्व ने आयुर्वेद को अपनाया। पतंजलि के प्रयासों से आयुर्वेद की स्वीकार्यता पूरे विश्व में बढ़ रही है।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर 75 अनुसंधानात्मक पुस्तकों के माध्यम से लोगों की सेवा, देश और दुनिया के लोगों को निरोगी बनाने के लिए, स्वामी रामदेव के रोगमुक्त भारत-रोगमुक्त विश्व मिशन के साथ अनुसंधान के द्वारा भारतीय संस्कृति परम्परा को स्थापित करने का प्रयास है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि वर्ल्ड हर्बल इन्साइक्लोपीडिया के कुल 109 वॉल्यूम तैयार किए जाने हैं। जिनमें पूरी दुनिया की जड़ी-बूटी आश्रित चिकित्सा पद्धति में औषधी के रूप में प्रयोग होने वाले पेड़-पौधों को शामिल किया जाना है। आज 51 वॉल्यूम का लोकार्पण किया गया है। शेष 58 वॉल्यूम आगामी वर्ष का लक्ष्य है। उन्होंने सभी देशवासियों को 15 अगस्त पर हर घर तिरंगा अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही 2 लाख तिरंगे संस्था की ओर से निःशुल्क वितरित करने की घोषणा की। उन्होंने नई 51 औषधियों के विषय में कहा कि आज इन 51 औषधियों को जनमानस तक विधिवत पहुँचाने का लाइसेंस, प्रोसेस, पेटेंट पूर्ण होेने के बाद इनका लोकार्पण किया जा रहा है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद के क्षेत्र में अपने कार्यों से देश व राष्ट्रनिर्माण में सहयोग कर रहे हैं।
प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संदेश के माध्यम से आचार्य बालकृष्ण को जन्मदिवस की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
समारोह में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, धनसिंह रावत, महामण्डलेश्वर अर्जुनपुरी महाराज, बड़ा अखाड़ा के महंत दामोदर दास, रूड़की विधायक प्रदीप बत्रा, पूर्व विधायक सुरेश राठौर, पूर्व विधायक संजय गुप्ता के साथ अनेक गणमान्य लोग व पतंजलि योगपीठ से सम्बद्ध सभी ईकाइयों के अधिकारी कर्मचारी, पतंजलि के विभिन्न प्रकल्पों से जुड़े सन्यासी व साध्वियां मौजूद रहे।

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