राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर नींबूवाला, देहरादून में द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) के 61वें वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। | Jokhim Samachar Network

Friday, April 19, 2024

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर नींबूवाला, देहरादून में द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) के 61वें वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।

राज्यपाल ने किया द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) के 61वें वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग
देहरादून     राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर नींबूवाला, देहरादून में द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) के 61वें वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश भर से दो हजार से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट एवं आठ देशों के डेलीगेट्स प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने सराहनीय सेवाओं के लिए फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर को सम्मानित किया साथ ही अधिवेशन की स्मारिका का विमोचन किया।
फेलोशिप अवार्ड्स से डॉ. उज्ज्वल, डॉ. तुशाल पालेकर, डॉ. संतोष, डॉ. शगुन अग्रवाल, डॉ. गणेश एवं सीईसी अवार्ड्स से डॉ. नेहल शाह और डिस्टिंग्विश अवार्ड से स्व. डॉ. राजीव (उनकी धर्म पत्नी रश्मी चतुर्वेदी द्वारा प्राप्त किया गया), डॉ. श्रेया राजू, डॉ. राजकुमार मीणा, डॉ. पारुल अग्रवाल एवं इंडियन मेडिको अवार्ड्स से डॉ. संदीप डी. सैनी एवं मोमेंटो ऑफ अवार्ड्स से डॉ. रीना कुमारी, डॉ. वैशाली, डॉ. एस.के. त्यागी, डॉ. भरत को सम्मानित किया गया।
अधिवेशन में राज्यपाल ने देवभूमि उत्तराखण्ड में इस आयोजन करने के लिए आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का क्षेत्र समाज सेवा का बहुत बड़ा माध्यम है जो ‘‘नर सेवा-नारायण सेवा’’ के समान होता है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली है कि इस पेशे को अपनाकर जन-जन की सेवा कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज की भाग-दौड़ की जिंदगी में जब इंसान अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित नहीं है, ऐसे में लोगों को सही आदतें, उचित मुद्रा, सही व्यायाम और उसके महत्व के बारे में जागरूक और शिक्षित करना बहुत जरूरी है। इस क्षेत्र में फिजियोथेरेपिस्ट का महत्वपूर्ण रोल है।
राज्यपाल ने कहा कि फिजियोथेरेपी के पेशे को नवीन तकनीकों और नवाचार के साथ जोड़ा जाना बहुत जरूरी है। नई तकनीकों से ही हम गुणवता में अधिक सुधार के प्रयास कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में प्रमाणिक शोध एवं अनुसंधान किए जाने की जरूरत है जिससे अधिक से अधिक लोग इस पद्धति से जुड़ें। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट अपना आत्म मूल्य पहचाने।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की देखभाल में आपकी भूमिका बहुत ही अहम है। जैसे-जैसे हमारी आबादी की उम्र बढ़ रही है, वृद्धावस्था देखभाल और पुनर्वास सेवाओं की मांग बढ़ रही है। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अपने साथ बहुत सारी चुनौतियां लेकर आती है, फिजियोथेरेपिस्ट इन चुनौतियों का समाधान बड़े अच्छे से कर सकते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आज तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बड़ी आबादी और स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती आवश्यकताओं के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी बहुत बढ़ रही हैं। लेकिन, इन चुनौतियों के बीच नवाचार करने और सभी के लिए एक स्वस्थ और अधिक समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने के अनेकों अवसर भी छिपे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि फिजियोथेरेपिस्ट इन चुनौतियों को अवसर में बदल कर “स्वस्थ भारत विकसित भारत” के निर्माण में अहम भूमिका अदा करेंगे।
सम्मेलन में द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजीव झा, महासचिव रुचि वासने, डॉ. यग्न शुक्ला, डॉ. मनीष अरोड़ा, डॉ. वसुधा वर्मा सहित इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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