सार्वभौमिक मानवाधिकार माह, सार्वभौमिक मानवाधिकार माह दुनिया में सभी के सम्मान, गरिमा, स्वतंत्रता के साथ स्वच्छ, स्वस्थ पर्यावरण तक पहुँच के लिये भी समर्पित:   स्वामी चिदानन्द सरस्वती   | Jokhim Samachar Network

Sunday, February 05, 2023

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सार्वभौमिक मानवाधिकार माह, सार्वभौमिक मानवाधिकार माह दुनिया में सभी के सम्मान, गरिमा, स्वतंत्रता के साथ स्वच्छ, स्वस्थ पर्यावरण तक पहुँच के लिये भी समर्पित:   स्वामी चिदानन्द सरस्वती  

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सार्वभौमिक मानवाधिकार माह और विश्व मानवाधिकार दिवस के पूर्व संदेश दिया कि नस्ल, रंग, लिंग, भाषा, विकलांगता, यौन अभिविन्यास, जातीयता, भौगोलिक स्थिति, धर्म, राजनीतिक, राष्ट्रीयता या सामाजिक मूल, संपत्ति, सामाजिक आर्थिक या अन्य स्थिति की परवाह किए बिना प्रत्येक को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार है। सभी के अधिकारों और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने के लिये 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष मानवाधिकार दिवस की थीम ‘डिग्निटी, फ्रीडम और जस्टिस फॉर ऑल’ है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सभी की गरिमा, स्वतंत्रता और न्याय के साथ ही स्वास्थ्य भी एक मौलिक मानव अधिकार है क्योंकि स्वास्थ्य के बिना कोई सम्मान, स्वतंत्रता और न्याय को कायम रखना सम्भव नहीं हो सकता। स्वास्थ्य का अधिकार यह सुनिश्चित करता है कि सभी को स्वच्छ और शुद्ध वातावरण प्राप्त हो सके। वर्तमान समय में मानवाधिकार से तात्पर्य यह भी है कि किसी को भी पीछे न छोड़ना तथा बिना किसी भेदभाव के सभी की पहुंच स्वच्छ जल, स्वच्छता और शुद्ध वायु तक बनाये रखना। स्वामी जी ने कहा कि स्वास्थ्य के अधिकार से तात्पर्य केवल स्वस्थ रहने तक सीमित नहीं है बल्कि बिना किसी हस्तक्षेप के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सहित अपने शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हो रही लिंग आधारित हिंसा सहित अन्य हिंसायें भी शामिल है क्योंकि इसके कारण ही महिलाओं और लड़कियों को जीवन पर गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि किसी के भी साथ किसी भी परिस्थिति में हो रहे भेदभाव को समाप्त करना सबसे जरूरी है। दिसम्बर को मानवाधिकार माह मनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपने जीवन का सम्मान करें और यह सुनिश्चित करें कि हमारे द्वारा दूसरों को किसीभी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
सार्वभौमिक मानवाधिकार माह दुनिया में सभी के सम्मान, गरिमा, स्वतंत्रता के साथ स्वच्छ, स्वस्थ पर्यावरण तक पहुँच के लिये भी समर्पित है ताकि प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ, स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार प्राप्त हो सके।
स्वामी जी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण क्षरण भविष्य में मानवता के सामने सबसे गंभीर खतरे हैं इसलिये जैवविविधता पर ध्यान देना होगा क्योंकि यह प्रकृति में हर उस वस्तु का समर्थन करती है जो हमें जीवित रहने के लिये आवश्यक है जैसे- भोजन, स्वच्छ जल, दवा और आश्रय।

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