भारत का संगठित स्वरूप सरदार पटेल जी की दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा की देन:  स्वामी चिदानन्द सरस्वती | Jokhim Samachar Network

Monday, March 04, 2024

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भारत का संगठित स्वरूप सरदार पटेल जी की दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा की देन:  स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकश। सरदार वल्लभभाई पटेल जी की पुण्यतिथि पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा दिल्ली में आयोजित ’सरदार पटेल जी का योगदान’ सेमिनार में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग कर भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित कर उद्बोधन दिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का आधार उस राष्ट्र की एकता और अखंडता में निहित होता है और सरदार पटेल भारत की एकता के सूत्रधार थे, उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा को नमन। उनका राष्ट्र के प्रति जो समर्पण था उसे सदैव याद किया जायेगा। सरदार पटेल जी ने रियासतों का एकीकरण कर राष्ट्र को मजबूती प्रदान कर जो एकता व अखंडता का संदेश दिया वह अविस्मर्णीय है। आज हम जो भारत का संगठित स्वरूप देख रहे हैं। वह सरदार पटेल जी की दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा का ही परिणाम है।
स्वामी जी ने कहा कि सरदार पटेल जी ने एकता की अद्भुत मिसाल कायम की। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और राष्ट्र की सेवा हेतु समर्पित कर दिया। उन्होंने अपनी व्यवहार कुशलता और कुशाग्रता के बल पर देशी रियासतों के एकीकरण का प्रबंधन किया। उनकी दूरदर्शिता देखकर ही महात्मा गांधी जी ने भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की 562 स्वतंत्र रियासतों के विलय का अत्यंत जटिल और संवेदनशील कार्य उनके हाथों मंे सौंपा जिसे उन्होंने कुशलता से सम्पन्न किया। रियासतों के मालिकों को देशभक्ति और राष्ट्रीय संवेदना के प्रति सजग करते हुये सभी से देश हित में कार्य करने का आह्वान किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सरदार पटेल ने यह संदेश दिया कि हृदय में अगर राष्ट्रप्रेम की भावना हो तो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को एकता के सूत्र में बांधना मुश्किल नहीं है। देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले, भारत की एकता के सूत्रधार सरदार पटेल ने राष्ट्र निर्माण हेतु अमूल्य योगदान दिया।   असाधारण संकल्प शक्ति, अद्भुत कार्यशैली, समर्पण वृत्ति और अलौकिक व्यक्तित्व के धनी सरदार पटेल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि और उनकी राष्ट्र भक्ति को नमन, वे हमेशा हम सभी देशवासियों के हृदय में बसे रहेंगे। आईये आज के दिन हम सब भारत की एकता और अखंडता को बनाये रखने के संकल्प को अधिक निष्ठा और दृढ़ता से आगे बढ़ायें यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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