वोट डालने से नहीं चूकते प्रदेश के वन गुज्जर | Jokhim Samachar Network

Tuesday, October 20, 2020

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वोट डालने से नहीं चूकते प्रदेश के वन गुज्जर

देहरादून। वन गुज्जरों की नई पीढ़ी अब जंगल से निकल कर समाज की मुख्यधारा में मिलना चाहती है और विस्थापन की राह देख रही है। मतदान के महापर्व में हर किसी की भागीदारी महत्वपूर्ण है. निर्वाचन आयोग पूरी कोशिश कर रहा है कि सभी लोग मतदान में हिस्सेदारी करें इसके लिए स्वीप टीमें लगी हुई हैं। उत्तराखंड में कई जगह और कई समुदाय ऐसे हैं जहां से वोटर्स के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचना भी आसान नहीं है लेकिन ये लोग अपने मताधिकार का प्रयोग हर बार करते हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में बरसों से रह रहे गुज्जर समुदाय के लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल हर हाल में करते हैं। मतदान के महापर्व में हर किसी की भागीदारी महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग पूरी कोशिश कर रहा है कि सभी लोग मतदान में हिस्सेदारी करें इसके लिए स्वीप टीमें लगी हुई हैं। उत्तराखंड में कई जगह और कई समुदाय ऐसे हैं जहां से वोटर्स के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचना भी आसान नहीं है लेकिन ये लोग अपने मताधिकार का प्रयोग हर बार करते हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में बरसों से रह रहे गुज्जर समुदाय के लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल हर हाल में करते हैं।
मतदान के महापर्व में हर किसी की भागीदारी महत्वपूर्ण है. निर्वाचन आयोग पूरी कोशिश कर रहा है कि सभी लोग मतदान में हिस्सेदारी करें इसके लिए स्वीप टीमें लगी हुई हैं। उत्तराखंड में कई जगह और कई समुदाय ऐसे हैं जहां से वोटर्स के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचना भी आसान नहीं है लेकिन ये लोग अपने मताधिकार का प्रयोग हर बार करते हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में बरसों से रह रहे गुज्जर समुदाय के लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल हर हाल में करते हैं।
पौड़ी संसदीय सीट के यमकेश्वर विधानसभा में पड़ने वाले इन जंगलों में निवास करने वाले वनवासी गुर्जर 2019 के चुनाव में एक बार फिर अपने वोट से लोकतंत्र के महापर्व को मजबूत करने जा रहे हैं। क्षेत्र में आज भी लगभग 200 परिवार रह रहे हैं जिनकी जीविका वनों पर आधारित है। पौड़ी संसदीय सीट के यमकेश्वर विधानसभा में पड़ने वाले इन जंगलों में निवास करने वाले वनवासी गुर्जर 2019 के चुनाव में एक बार फिर अपने वोट से लोकतंत्र के महापर्व को मजबूत करने जा रहे हैं. क्षेत्र में आज भी लगभग 200 परिवार रह रहे हैं जिनकी जीविका वनों पर आधारित है। पौड़ी संसदीय सीट के यमकेश्वर विधानसभा में पड़ने वाले इन जंगलों में निवास करने वाले वनवासी गुर्जर 2019 के चुनाव में एक बार फिर अपने वोट से लोकतंत्र के महापर्व को मजबूत करने जा रहे हैं। क्षेत्र में आज भी लगभग 200 परिवार रह रहे हैं जिनकी जीविका वनों पर आधारित है।
हालांकि वन गुज्जरों की नई पीढ़ी अब जंगल से निकल कर समाज की मुख्यधारा में मिलना चाहती है और विस्थापन की राह देख रही है। हालांकि वन गुज्जरों की नई पीढ़ी अब जंगल से निकल कर समाज की मुख्यधारा में मिलना चाहती है और विस्थापन की राह देख रही है।
राजाजी नेशनल पार्क और आसपास के जंगलों में वनवासी गुर्जरों के कई डेरे हैं। सरकार ने इनके पुनर्वास के लिए समय-समय पर कदम तो उठाए हैं। कई गुज्जर परिवारों को पथरी और आशा रोड़ी में बसाया गया है तो कई बस्तियां राजाजी पार्क के गोहरी रेंज के कांसरो और मोती चूर के जंगलों में रह रही हैं। राजाजी नेशनल पार्क और आसपास के जंगलों में वनवासी गुर्जरों के कई डेरे हैं. सरकार ने इनके पुनर्वास के लिए समय-समय पर कदम तो उठाए हैं। कई गुज्जर परिवारों को पथरी और आशा रोड़ी में बसाया गया है तो कई बस्तियां राजाजी पार्क के गोहरी रेंज के कांसरो और मोती चूर के जंगलों में रह रही हैं।
राजाजी नेशनल पार्क और आसपास के जंगलों में वनवासी गुर्जरों के कई डेरे हैं। सरकार ने इनके पुनर्वास के लिए समय-समय पर कदम तो उठाए हैं। कई गुज्जर परिवारों को पथरी और आशा रोड़ी में बसाया गया है तो कई बस्तियां राजाजी पार्क के गोहरी रेंज के कांसरो और मोती चूर के जंगलों में रह रही हैं। पशुपालन और दुग्ध उत्पादों का काम करने वाले ये वन गुज्जर पीढ़ियों से जंगलों के बीच रहते आए हैं। लेकिन अब जंगली जानवरों के हमलों से यह भी परेशान होने लगे हैं। पशुपालन और दुग्ध उत्पादों का काम करने वाले ये वन गुज्जर पीढ़ियों से जंगलों के बीच रहते आए हैं लेकिन अब जंगली जानवरों के हमलों से यह भी परेशान होने लगे हैं। पशुपालन और दुग्ध उत्पादों का काम करने वाले ये वन गुज्जर पीढ़ियों से जंगलों के बीच रहते आए हैं लेकिन अब जंगली जानवरों के हमलों से यह भी परेशान होने लगे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि इस बार मुकाबला तगड़ा है और वोटर के मन की थाह लेने में तो बड़े-बड़े सैफोलॉजिस्ट चूक जाते हैं. इसलिए जंगल के बीच बसे इन वन गुर्जरों तक राजनीतिक दल भी पहुंचे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि इस बार मुकाबला तगड़ा है और वोटर के मन की थाह लेने में तो बड़े-बड़े सैफोलॉजिस्ट चूक जाते हैं। इसलिए जंगल के बीच बसे इन वन गुर्जरों तक राजनीतिक दल भी पहुंचे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि इस बार मुकाबला तगड़ा है और वोटर के मन की थाह लेने में तो बड़े-बड़े सैफोलॉजिस्ट चूक जाते हैं। इसलिए जंगल के बीच बसे इन वन गुर्जरों तक राजनीतिक दल भी पहुंचे हैं।

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