महाराज ने कहा इनर लाइन को पुनः जौलजीबी में स्थापित किया जाये | Jokhim Samachar Network

Monday, January 18, 2021

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महाराज ने कहा इनर लाइन को पुनः जौलजीबी में स्थापित किया जाये

-’गृह मंत्री अमित शाह एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र’

देहरादून । प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, सिंचाई एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने देश की आंतरिक एवं बाहृय सुरक्षा को  देखते हुए इनर लाईन पुनः जौलजीवी में स्थापित करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है।
उत्तराखंड के जनपद पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के अंतर्गत ब्यांस, चैंदास एवं दारमा घाटियां नेपाल एवं चीन की सीमाओं से लगी हैं जो सामरिक एवं भू-राजनीतिक दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। सतपाल महाराज ने सुरक्षा की दृष्टि से  बाहरी लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने हेतु गृहमंत्री अमित शाह एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर जौलजीबी में पुनः इनर लाईन स्थापित करने अनुरोध किया है।
श्री महाराज ने रक्षा मंत्री एवं गृहमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि सामरिक दृष्टि से लंबे समय तक जौलजीबी में इनर लाईन स्थापित रहा, जिसे कि 1990-91 मैं बिना किसी व्यावहारिक प्रमाण के केंद्र सरकार द्वारा इनर लाईन को जौलजीबी से हटा कर दारमा घाटी में मारछा एवं ब्यांस घाटी के छियालेख नामक स्थानों में स्थानांतरित कर दिया गया। श्री सतपाल महाराज ने दोनों केन्द्रीय मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा है कि मारछा एवं छियालेख जो कि नेपाल से लगा होने के साथ-साथ चीन की सीमा रेखा से मात्र 40 कि.मी. की दूरी पर हैं। वर्तमान में जबकि चीन के साथ जारी सीमा विवाद एवं उसकी विस्तारवादी नीति से वह नेपाल के माध्यम से हमारे देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। साथ ही ब्यांस, चैंदास एवं दारमा के स्थानीय निवासी भोटिया जनजाति के सरल एवं शांतिप्रिय लोग जो यहां की विरासत को अक्षुण बनाये हुए हैं। इनर लाईन के अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के निकट होने व इस क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों के बढ़ने से स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जो कि देश की सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती हो पैदा कर सकता है। पर्यटन मंत्रीसतपाल महाराज ने गृहमंत्री अमित शाह एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में देश की आंतरिक एवं बाहृय सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इनर लाईन पुनः जौलजीबी में स्थापित करने की मांग की है।

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