कहीं गायब न हो जाय सच के दस्तावेज | Jokhim News

Thursday, August 24, 2017

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कहीं गायब न हो जाय सच के दस्तावेज

कागज के पीछें छिपी परछाइयां से लेकर किताबों तक ईमानदारी की ओर जाते देश में अम्बानी और अदानी की कहानियाँ चर्चाओं में है और हर कोई यह जानने के आतुर दिख रहा है कि वह कौन सा चमत्कार है जिसके चलते कुछ चुनिन्दा लोग नामचीन हस्तियों में शामिल हो गये और उनसे जुड़े लोग या फिर यों कहिंये कि उन्हें प्रगति की राह पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करने वाले लोग एकाएक ही काल के क्रूर हाथों द्वारा दबोच लिये गये। बड़े आदमी के बारे में जानने को हर कोई बैचेंन रहता है और कुछ सनकी लोग पत्रकारिता के नाम पर तमाम अच्छी-बुरी खबरों को जनता के सामने लाना अपना कर्तव्य व पेशा समझतें हुऐ कुछ लिखित दस्तावेजों व सबूतों को किताब का रूप देकर बाजार में लाने की कोशिश भी करते है लेकिन बड़े आदमी का तो नाम भी बड़ा होता है और इस बड़े आदमी के नाम को इस्तेमाल करके आने वाली किताबें बाजार में पहुँचने से पहले ही उठा ली जाती है। मजे की बात यह है कि जो आम जनता इस बड़े आदमी के बारे में जानना चाहती थी उसे इस किताब या ऐसी किसी घटना के बारे में कोई खबर नही होती। वह तो सिर्फ सोचती रहती है कि अंबानी या अदानी में किस कोने से मेहनत शुरू की और रामदेव ने सिर्फ योग के बल पर इतना बड़ा तंत्र कैसे खड़ा कर लिया। उनके लिऐ यह भी आश्चर्य का विषय है कि बाजार में छायी मंदी के बावजूद अमित शाह ऐसा कौन सा व्यवसाय कर रहे है कि उनकी सम्पत्ति दिन-दूनी रात चैगुनी रफ्तार से बढ़ रही है लेकिन जनता फिर भी खुश है क्योंकि देश का पैसा देश में है और देश आर्थिक प्रगति कर रहा है। तेज रफ्तार से हो रहे इस विकास के क्रम में अगर कोई देश छोड़कर भाग भी रहा है तो वह विजय माल्या जैसा कंगला है जिसे देश भर के तमाम बैंको की करोड़ों की देनदारी है और इस नुकसान की भरपाई के लिऐ भी सरकार बहादुर ने अजब योजना निकाली है जिसके तहत हर छोटी-बड़ी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिऐ न सिर्फ बैंक में खाता खोला जाना जरूरी है बल्कि इस खाते में एक निर्धारित राशि न रखने की स्थिति में प्रति माह एक निश्चित शुल्क दिया जाना भी जरूरी कर दिया गया है। वैसे यह आइडिया भी कमाल का है कि मत मांगों सरकारी योजना का अनुदान और मत खोलो खाता क्योंकि सम्पन्न होते भारत में छूट, सब्सिडी, निशुल्क व सरकारी सहायता का खेल तो बंद होना ही चाहिऐं वरना पूरा देश एक मंगतों की जमात बनकर रह जायेगा। इसलिऐं मांगने, छूट लेने तथा सरकारी सहायता व अनुदान का हक सिर्फ उन्हीं लोगों तक रहने दो जिन्हें मांगने की आदत है और यह सब जानते है कि जो जनता का बेवकूफ बनाकर सत्ता के उच्च सदनों तक जा बैठे है उनसे अच्छा मांगना कौन जानता हैं इसलिऐं निशुल्क रेल व हवाई यात्रा, बिना ब्याज के कार और मकान लोन तथा वेतन के अलावा अन्य तमाम तरह के भत्तों के साथ ही सरकारी कैन्टीन में सस्ते भोजन की सुविधा उन्हें ही मुबारक। आम आदमी को चाहिऐं कि वह पुरूषार्थ करें और ईमानदारी व मेहनत से काम करते हुऐ अपनी कमाई में से एक हिस्सा सरकारी टैक्स के रूप में इन तमाम जनसेवकों की जरूरी-गैर जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिऐ अदा करें क्योंकि उन्हें सिर्फ हमारे लिये ही चिन्तित नही होना बल्कि अम्बानी, अदानी और बाबा रामदेव जैसे कुछ और भी लोग जिन्दगी की जद्दोजहद में तेजी से आगे बढ़ने के लिऐ इनका इंतजार कर रहे है और यह जनसमस्याओं पर चिन्तन करते हुऐ समाज के लिऐ चिन्तित है। इसलिऐं आप हताश और निराश न हो बल्कि अच्छे दिनों को इंतजार करें। आज नहीं तो कल आपका नम्बर भी आयेगा और अब तो जल्द चुनाव आने वाले है। जिनका नम्बर नही आया उन्हें कोई नया शगूफा पकड़ाया जायेगा। वैसे भी देश के प्रधानमंत्री द्वारा उद्घोषित कर दिया गया है कि अब वह साम्प्रदायिकता व जातिवाद के खिलाफ नया मिशन शुरू करने वाले है। अगर गंभीरता से गौर करेें तो करने वाले नहीं है बल्कि कर दिया है और इसकी शुरूवात भी इस अंदाज में हुई है कि किसी को कानोंकान खबर न हो क्योंकि देश के प्रधानमंत्री मोदी व उनका राजनैतिक दल भाजपा कहने से कहीं ज्यादा करने पर विश्वास रखता है। सब जानते है देश मंे सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार, जातिवाद व साम्प्रदायिकता की भावना राजनैतिक दलों के बीच से आती है और कुछ नेता अपने व्यक्तिगत् फायदें के लिऐ देश व समाज में इस तरह के टंटे फैलाते है। लिहाजा जनसेवक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आवहन पर उनके अग्रदूत अमित शाह राजनैतिक मोर्चो पर सफाई क लिऐ निकल पड़ें है और इसके लिऐ उन्होंने तमाम विपक्षी दलों पर हमलावर होकर तोड़-फोड़ की प्रक्रिया को अपनाना शुरू भी कर दिया है। अमित शाह का लक्ष्य है कि पूरे राष्ट्रीय पटल पर शुचिता, आदर्श एंव त्याग की बात करने वाले भाजपा के क्रान्तिवीरों का ही कब्जा होना चाहिऐ लेकिन इस लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति से अन्य दलों के बेरोजगार नेताओं व निवर्तमान या पूर्व जनप्रतिनिधियों के फड़फड़कार आन्दोलन व धरना-प्रदर्शन के लिऐ एकजुट होने का खतरा भी है। इसलिऐं आम जनजीवन को व्यवधान मुक्त करने के उद्देश्य से ऐसे तमाम राजनीतिज्ञों को भाजपा रूपी वैतरणी में डुबकी लगवाते हुऐ शुद्धिकरण कर उनके राजाश्रय को यथावत रखने का विकल्प भी खुला रखा गया है तथा इस पुनीत राजकार्य में व्यवधान डालने वाले विपक्ष के चुनिन्दा चेहरों के लिऐ सामाजिक रूप से सजाये मौत का ऐलान करते हुऐ उनके चारित्रिक हनन व सामाजिक मर्यादा को ठेस पहुँचाने की कार्यवाही को अंजाम देने के लिऐ आयकर विभाग से लेकर तमाम तरह के अन्य सरकारी उपक्रमों के अलावा भाजपा के उन तमाम क्रान्तिवीरों की ही मदद ली जा रही है जिन्हें राष्ट्रवादिता और देशभक्ति के प्रमाणपत्र बांटने का ठेका सरकार ने अपने शुरूवाती दौर में ही दे दिया था। यह निश्चित जानियें कि राजनीति को जातिवाद एवं साम्प्रदायिकता से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य को लगभग रूप से हासिल करने के साथ ही सरकार इस संदर्भ में अन्य कार्यवाहियों के लिऐ एक बार फिर आपके द्वार अवश्य आयंेगी। तब तक प्राथमिक तैयारियों के तौर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिऐं सरकार ने जनता को तीन तलाक, गाय और गऊमाता मोब इंचिग व अविश्वास जैसे तमाम मुद्दे दे दिये है। उम्मीद की जानी चाहिऐं कि आप सभी जनता इन तमाम विषयों व मुद्दों पर निरतंरता के क्रम में सरकार एवं विचारधारा का ठीक उसी प्रकार समर्थन करते रहेंगे, जैसा कि आपने अभी तक नोटबंदी, जीएसटी व अन्य तमाम विषयों पर किया है। हमें यकीन है कि अगर आप इसी तरह सरकार का सहयोग करते रहे तो एक दिन अम्बानी, अदानी और बाबा रामदेव वाली लाइन में आपको भी जगह हासिल हो जायेगी और आप भी संसाधनों से लबलेज होकर गर्वान्मुक्त तरीके से सरकार व सरकार चलाने वाले की जय बोल सकेंगे लेकिन एक सौ पच्चीस करोड़ आबादी वाले मुल्क में आपका नम्बर कब आयेगा, इस बात की कोई गारन्टी नहीं तो आओ इस जनसंख्या को कम करने के लिऐ कुछ देर दंगा-दंगा खेल लें।

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