योगी के राज में | Jokhim News

Thursday, September 21, 2017

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योगी के राज में

‘स्कूलों की छुट्टियां कम करने तथा सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने‘ जैसे आदेशों के बाद उत्तर प्रदेश के हालातो में होगा अमूलचूल परिवर्तन।
कुर्सी संभालने के बाद से ही एक बाद एक लोकलुभावन फैसले लेते नजर आ रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि सारे देश सारे देश की उत्सुकता बनी हुई है और सत्ता में आने के बाद से ही मीडिया में छाये दिख रहे योगी आदित्यनाथ के हर फैसले का आशय व निहितार्थ समझने का मतदाताओं द्वारा ही नहीं बल्कि नेताओं द्वारा भी गंभीर प्रयास किया जा रहा है। राजनीति में यह कम ही दिखता है कि सत्ता के शीर्ष पर काबिज राजनैतिक दल द्वारा लिये गये तथाकथित रूप से जनहितकारी फैसलों का जनता के साथ ही साथ विपक्ष द्वारा भी स्वागत् किया जाय लेकिन योगी आदित्यनाथ के मामले में इसका उलट होता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने जब यह घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में कार्यरत् सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़़ेंगे तो जनता ने सरकार के इस फैसले का स्वागत् किया और पूर्व में न्यायालय द्वारा भी इस संदर्भ में दिये गये दिशा निर्देश का अनुपालन न किये जाने पर जनता द्वारा यह उम्मीद जताई गयी कि योगी सरकार अपने इस फैसले को शीघ्रातिशीघ्र धरातल पर उतारकर सरकारी देख-रेख में चलने वाले प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के विद्यालयों की दशा सुधारने के लिऐ प्रयास करेंगी। ठीक इसी प्रकार किसानों की ऋण वापसी के मुद्दे पर योगी के इस फैसले से समुचे विपक्ष समेत राहुल गांधी ने इत्तेफाक जताया और व्यापक जनहित में लिये गये इस फैसले के लिऐ उन्हें बधाई दी। अब इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुये योगी आदित्यनाथ ने जब महापुरूषों के जन्म दिवस अथवा निर्वाण दिवस के अवसर पर दी जाने वाली स्कूलों की छुट्टी को निरस्त करते हुये इन अवसरों पर स्कूल खोलने का आदेश देते हुये छात्र-छात्राओं को महापुरूषों के जीवन चरित्र व समकालीन घटनाओं से रूबरू कराने की घोषणा की तो उनकी इस पहल का स्थानीय जनता के साथ ही साथ उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने भी स्वागत् किया। हालात इशारा कर रहे है कि योगी धड़ल्ले के साथ जो भी फैसले ले रहे है जनता द्वारा उन्हें न सिर्फ सराहा जा रहा है बल्कि अन्य राजनैतिक दलों के बड़े नेताओ द्वारा भी, इन फैसलों के संदर्भ में दिया गया बयान यह साबित करता है कि प्रदेश व देश में कार्य कर रही अन्य राजनैतिक विचारधाराऐं भी इन फैसलों से सहमत है लेकिन इच्छा शक्ति के आभाव में अपने सत्ता काल में उनके द्वारा इन फैसलों कोे लागू नही किया जा सका। योगी हठ योग परम्परा के संत है और उनका अब तक का इतिहास यह इशारा करता है कि एक संत के रूप में उनका निजी जीवन सादगी भरा, सरल व निष्कंलक रहा है। इन हालातों में हम यह उम्मीद कर सकते है कि अगर भाजपा हाईकमान ने राजनीति के मैदान में सरपट भाग रहे योगी की सत्ता डाॅवाडोल करने की कोशिश नही की तो वह उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हालातों में कई मूलाभूत परिवर्तन लाकर इसे उत्तम-प्रदेश बनाने में कामयाब होंगे और संत परम्परा से निकलकर राजनीति में आये योगी आदित्यनाथ को कट्टरवादी हिंदू व धार्मिक उम्माद भड़काकर जनपक्ष के एक हिस्से को अपने साथ लेकर चलने वाला बताने वाले मीडिया व तथाकथित धर्मनिरपेक्ष ताकतों को स्वतः ही अपने प्रश्नों का जवाब मिल जायेगा। एक मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ द्वारा अब तक लिये गये तमाम फैसले सामयिक व कानून के दायरें में है तथा इस तथ्य से इनकार नही किया जा सकता कि तड़क-भड़क से दूर सादगी भरा जीवन जीने वाले योगी आदित्यनाथ ने अपनी कार्यशैली व तार्किकता के बल पर उत्तर प्रदेश की बिगड़ेल नौकरशाही को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है। उनके द्वारा लिये गये अवैध बूचड़खाने बंद करने के फैसले ने वर्तमान में एक सम्प्रदाय विशेष से जुड़े कुछ हजार व्यवसायियों की रोजी-रोटी पर प्रभाव भले ही डाला हो और उनके इस फैसले को साम्प्रदायिकता के चश्में से देखने की कोशिश भले ही की जा रही हो लेकिन यह तय है कि योगी का यह फैसला पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक बड़ा फैसला साबित होगा और अगर उन्हें अपने इस फैसले पर कायम रहते हुये लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा करने का मौका मिला तो वह दिन दूर नही जब उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश ही नही बल्कि विश्व के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जायेगा। यह ठीक है कि महिलाओं द्वारा दैनिक जीवन में पहने जाने वाले वस्त्रों को लेकर योगी द्वारा व्यक्त किये गये विचारों तथा उनकी सरकार द्वारा गठित की गयी एंटी रोमियों स्क्वायड को लेकर कुछ आधुनिकतावादी सहमत नही है और सरकार की इन कोशिशों को निजिता पर हमला बताया जा रहा है लेकिन अगर स्थानीय पुलिस प्रशासन इस परिपेक्ष्य में ठीक-ठाक कार्यवाही करता है और सरकारी मशीनरी शोहदो व वैक्तिक सम्पर्कों के आधार पर प्रेम संबंध बढ़ाने वालो में फर्क करने में सफल रहती है तो यह विरोध भी धीरे-धीरे समाप्त हो जायेगा। इस तथ्य से इनकार नही किया जा सकता कि समाज में आधुनिकता के साथ ही साथ कई तरह की विकृतियाँ भी आ गयी है और इन विकृतियों को दूर करने के लिऐ आवश्यक है कि हमारी सरकार व प्रशासन कुछ मामलों में कड़ा रूख अपनायें। योगी की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद इसी दिशा में काम शुरू किया है और अब स्कूलों को लक्ष्य बनाकर युवा मन पर महापुरूषों के जीवन की अमिट छाप छोड़ने की योगी की योजना अभूतपूर्व है क्योंकि अगर ऐसा हो पाया तो हमें चारित्रिक रूप से दृढ़ व राष्ट्रप्रेमी भारत के निर्माण में आसानी होगी और भारत माता की जय व वंदेमातरम् जैसे नारो का राजनैतिक उपयोग स्वतः ही समाप्त हो जायेगा।

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