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Monday, December 11, 2017

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अपेक्षाओं और आकांक्षाओँ के बीच

इस बार कमजोर प्रत्याशी नहीं कही जा सकती इन्दिरा हृदयेश

उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा, उत्तराखण्ड की दिग्गज नेता व मौजूदा सरकार में मन्त्री इन्दिरा हृदयेश के खिलाफ किसी दमदार प्रत्याशी को उतार उन्हें उनके ही निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित रखने का प्रयास करेगी लेकिन भाजपा की ओर से चुनाव मैदान में उतारे गये हल्द्वानी नगर निगम के मेयर जोगेन्द्र रौतेला के चुनावी अंदाज को देखकर यह नहीं लग रहा कि वह इसी अनुभवी नेत्री को टक्कर दे पायेंगे। हाॅलाकि मृदुभाषी व व्यवहार कुशल माने जाने वाले जोगेन्द्र स्थानीय स्तर पर युवाओं व भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय है और सबको साथ लेकर चलने के उनके अन्दाज व भाजपा हाईकमान द्वारा उनपर जताये गये विश्वास को देखते हुऐ यह कहा जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर वह भाजपा के एक बेहतर प्रत्याशी है लेकिन इन्दिरा हृदयेश के राजनैतिक अनुभव तथा उनकी राजनैतिक सक्रियता के चलते अगल-बगल की सीटों पर उनके राजनैतिक प्रभाव को देखते हुऐ यह कहा जाना मुश्किल है जोगेन्द्र एक दमदार प्रत्याशी के रूप में इन्दिरा हृदयेश की राजनैतिक घेराबन्दी करने में सफल भी हो पायेंगे। यह ठीक है कि जोगेन्द्र रौतेला को उनकी स्वच्छ छवि व एक मेयर के रूप में किये गये कार्याे का फायदा मिल सकता है तथा हल्द्वानी से ही हुई उनकी शिक्षा-दिक्षा के अलावा नगर पालिका सदस्य के रूप में दो अलग-अलग वार्डो में पूरा किया गया बेदाग कार्यकाल भी उनका मददगार हो सकता है लेकिन गफूर बस्ती मामले में प्रदेश सरकार की पैरवी पर उच्चतम् न्यायालय से मिला स्टे तथा नोटबन्दी के मामले में मोदी सरकार से नाराज दिखता बाजार का व्यापारी वर्ग वह दो सबसे अहम् कारण है जो इस चुनाव में इन्दिरा हृदयेश को एक बड़ी जीत मिलने की सम्भावनाओं की ओर इशारा कर रहे है। उपरोक्त के अलावा बढ़ती उम्र के साथ कम हुई दिख रही इन्दिरा हृदयेश की तल्खी तथा सरकार में रहते हुऐ बिना किसी भेदभाव के समुचे हल्द्वानी शहर में हुआ विकास इन्दिरा हृदयेश की चुनावी जीत के अन्तराल को और बढ़ा सकता है। इस तथ्य को भी नकारा नही जा सकता कि उनकी यह आसान जीत हल्द्वानी से लगे लालकुॅआ, भीमताल, नैनीताल व कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्रो को भी प्रभावित करने में पूरी तरह सक्षम रहेगी और अगर भाजपा के बड़े नेताओं ने इन्दिरा हृदयेश को उनके ही चुनाव क्षेत्र में घेरकर रखने का पुख्ता इंतजाम नही किया तो वह उधमसिंह नगर के राजनैतिक समीकरणों को भी प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है। वर्तमान तक यह माना जा रहा था कि इस चुनाव में सिर्फ हरीश रावत ही काॅग्रेस का मुख्य चुनावी चेहरा होंगे और टिकट आंबटन के बाद समुचे प्रदेश में घूमघूमकर काॅग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करना व उन्हें विजयी बनाने के लिऐ जोड़-तोड़ करना उनकी अहम् जिम्मेदारी होगी लेकिन इधर इन्दिरा हृदयेश को मिल रही आसान जीत यह इशारा कर रही है कि आगामी चुनावों में वह भी अपना विधानसभा क्षेत्र छोड़कर आसानी के साथ आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी कार्यकुशलता का परचम लहरा पायेंगी और उनको मिला यह राजनैतिक अवसर भाजपा के लिऐ एक बड़ी भूल साबित होगा। यह ठीक है कि प0 नारायण दत्त तिवारी के भाजपा के प्रति रूझान और जोगेन्द्र रौतेला की मुस्लिम बस्तियों में पैठ के अलावा निर्दलीय व सपा या बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे अनेक मुस्लिम चेहरो को देखते हुऐ यह कहना मुश्किल है कि हल्द्वानी का मुस्लिम मतदाता इस बार इन्दिरा हृदयेश के पक्ष में एकमुस्त मतदान करेगा या फिर दलितो, मुस्लिमों, व्यापारियों व पहाड़ी समुदाय के एकमुश्त जनसमर्थन से इन्दिरा ह्नदेश इस बार एकतरफा जीत हासिल करेंगी लेकिन हालात यह इशारा तो कर रहे है कि इस बार इन्दिरा हृदयेश की चुनावी राह मुश्किल नही ह। जातीय अंकगणित व धार्मिकता के जुनून से दूर नजर आने वाले हल्द्वानी विधानसभा चुनावों को लेकर मतदाता के मन में क्या खिचड़ी पक रही है, इसका असल अन्दाजा तो अब 15 मार्च को ही आयेगा लेकर हवा को देखकर जनता का रूख पहचानने की कोशिश में हम सिर्फ यहीं अन्दाजा लगा पाये है कि इस बार स्थानीय जनता के बीच इन्दिरा हृदयेश की कार्यशैली को लेकर नाराजी नही है और इस तथ्य का अन्दाजा उनके नामांकन के लिऐ उमड़ने वाले जनसैलाब को देखकर भी लगाया जा सकता है।

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